कभी हम थे बेवफा
कभी तुम थे खफा
पर इनमे भी था एक मज़ा
जिसमे था प्यार का नशा
वो तेरा तन्हाई में आना
खाली दिल को खुशी दे जाना
अच्छा लगता था तेरा मुस्कुराना
मुझे देख के हल्का शर्माना
सोचा था सब कह दूंगा एक दिन
देखते रह जाएगा जहाँ
पर था डर तुम्हे खोने का
इसलिए बंद रही जुबां
वो दिन था सुहाना
कहनी थी दिल की बात
पंहुचा उसके घर के पास
सोचा आई है सौगात
पहुच कर उसके करीब
बोला तुम हो मेरा नसीब
पकड़ कर उसका हाथ
केह दी दिल की बात
वो बोली क्यू करते हो नादानी
मैं हूँ किसी और की रानी
टूट गया मेरा सपनों का जहाँ
ख़त्म हुई प्यार की दास्ताँ
